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Monday, 8 November 2010

मुफ्त सब्जी..

रलदू , जद मैं मंडी म्ह
सूट की बजाये गंदे कपड़े पैहर कै
जाऊं तो सब्जी सस्ती मिलै सै |
घुग्घू, तू हाथ म्ह कटोरा लेकै जाया कर |
तन्नै सब्जी मुफ्त मिल ज्याआ करैगी ||

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना|

    नवसंवत्सर २०६८ की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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